Tartam Sagar

Shri Tartam Sagar

श्रीसाथनो प्रबोध-राग धन्यासरी संभारो साथ, अवसर आव्यो छे हाथजी। आप नाख्या जेम पहेले फेरे, वली नाखजो एम निघातजी।।१ इन्द्रावती कहती है, हे सुन्दरसाथ जी ! स्मरण करो, हमें तीसरे ब्रह्माण्डमें पहुँ…

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सेवा-पूजा